Inorganic marketing क्या है? Inorganic marketing की पूरी जानकारी

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वैसे inorganic marketing का इस्तेमाल एक बिजनेस/स्टार्टअप द्वारा किया जाता है लेकिन कुछ नए लोगों को inorganic marketing के बारे में ज्यादा कुछ जानकारी नहीं होता है।

बहुत से लोग ऑर्गेनिक मार्केटिंग और inorganic marketing दोनों को एक ही समझ लेते हैं। हमें अपनी वेबसाइट easyinfo.in पर ऑर्गेनिक मार्केटिंग के बारे में विस्तार पूर्वक बताया है और आज हम inorganic marketing के बारे में आप लोगों को बताने वाले हैं।

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inorganic marketing क्या है?

इस पोस्ट में हम सबसे पहले आपको यह बता दे कि inorganic marketing क्या होता है? इनऑर्गेनिक मार्केटिंग काफी हद तक ऑर्गेनिक मार्केटिंग के जैसा ही होता है जिसमें कि सबसे पहले एक कंटेंट बनाना होता है और उसके बाद फिर उस कंटेंट को डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे कि यूट्यूब सोशल, फेसबुक, इंस्टाग्राम पर अपलोड करना होता है। उसके बाद ऐड का इस्तेमाल करके ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जाता है। 

हम आपको बता दें कि इनऑर्गेनिक मार्केटिंग में video ads on YouTube, paid search ads, paid social media ads, display ads, sponsored posts, sponsored video, आदि शामिल होते हैं। 

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inorganic marketing का फायदा

चलिए अब हम inorganic marketing के कुछ फायदे बता देते हैं जो कुछ इस प्रकार से हैं:

  • इनऑर्गेनिक मार्केटिंग का इस्तेमाल करके micro-target किया जा सकता है। यानी कि ऐसे ऑडियंस के पास पहुंचा जा सकता है जो हमारे प्रोडक्ट या सर्विस को खरीदने के लिए बिल्कुल भी तैयार है। 
  • इनऑर्गेनिक मार्केटिंग का फायदा है कि इससे बहुत जल्द ज्यादा से ज्यादा ऑडियंस तक पहुंचा जा सकता है ऑर्गेनिक मार्केटिंग के मुकाबले में। 
  • इनऑर्गेनिक मार्केटिंग की मदद से किसी भी नए बिजनेस में ग्राहक लाए जा सकते हैं या बिजनेस का एक ब्रांड वैल्यू बनाया जा सकता है। 
  • इनऑर्गेनिक मार्केटिंग करने के लिए ज्यादा कंटेंट बनाने की जरूरत बिल्कुल नहीं होती है। 
  • इनऑर्गेनिक मार्केटिंग से मार्केट रिसर्च भी किया जा सकता है और अपने ग्राहक की पहचान भी की जा सकती है। 

inorganic marketing का नुकसान

  • इनऑर्गेनिक मार्केटिंग को करने के लिए पैसे का इन्वेस्ट करना होता है क्योंकि सबसे पहला इसका नुकसान है। 
  • इनऑर्गेनिक मार्केटिंग में पैसा इन्वेस्ट करने के बाद भी इसकी कोई गारंटी नहीं होती है कि ग्राहक मिल पाएंगे या नहीं। या जिस इरादे से हम ऐड चला रहे हैं वह पूरा हो पाएगा या नहीं। तो यह भी इनऑर्गेनिक मार्केटिंग का एक नुकसान ही है। 
  • कई रिसर्च यह दावा करती हैं कि 75 परसेंट इंटरनेट यूजर एड्स को बिल्कुल भी पसंद नहीं करते हैं तो यह भी एक इनऑर्गेनिक मार्केटिंग का नुकसान है कि 75 परसेंट ऑडियंस को आप खो सकते हैं।  

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inorganic marketing कैसे करे?

inorganic marketing kaise kare
inorganic marketing kaise kare

अब हम आपको बताते हैं कि इनऑर्गेनिक मार्केटिंग को कैसे किया जा सकता है और कैसे अन्य लोग इन ऑर्गेनिक मार्केटिंग को करते हैं। तो यह कुछ इस तरह से है:

सबसे पहले अपने बिजनेस के लिए लक्ष्य तैयार कर ले

चाहे आप किसी भी तरह की ऑनलाइन मार्केटिंग करना चाहते हैं तो आपको यह लाइन सबसे पहले मिलेगा कि आप अपने बिजनेस के लक्ष्य को तैयार कर ले। लेकिन हम आपको बता दें कि अन्य किसी भी तरह की मार्केटिंग में अगर आप तुरंत लक्ष्य तैयार नहीं करते हैं तो भी आपको किसी भी तरह की कोई समस्या नहीं आएगी। 

लेकिन inorganic marketing एक ऐसे ऑनलाइन मार्केटिंग हैं जिसमें कि आपको तुरंत लक्ष्य तैयार करना होता है क्योंकि जब आप इन ऑर्गेनिक मार्केटिंग करेंगे तो आप पैसा इन्वेस्ट करना होता है और इसी कारण आपको तुरंत ऑडियंस तक पहुंचने का विकल्प मिल जाता है।  तो आपको पहले ही तय करना होगा कि आप कितने ऑडियो तक पहुंचना चाहते हैं, आप ऑडियंस से क्या चाहते हैं, क्या आपके चैनल को सब्सक्राइब करें, आपके फोल्लोवेर्स बने या फिर आपके ग्राहक बने। यह सब चीजें आप पहले ही तय कर ले। 

targeted audience को समझ लीजिए 

अब आपको अपने टारगेटेड ऑडियंस के बारे में सोच लेना है कि आपके इरादे/बिज़नेस के लिए किस तरह के टारगेट ऑडियंस सबसे बेहतर हो सकते हैं। एड्स चलने पर तो अनगिनत ऑडियंस आपके पास आ सकती है लेकिन इस ऑडियंस से क्या फायदा जिससे आपको मन चाहा रिजल्ट ना मिल सके। 

विज्ञापन चलाने के लिए प्लेटफार्म का चयन करें

हर एक कंपनी के लिए अलग-अलग प्लेटफार्म विज्ञापन चलाने के लिए बेहतर होता है। अलग-अलग तरह के प्लेटफार्म पर अलग-अलग तरह के ऑडियंस मौजूद होते हैं। बिजनेस के ऊपर निर्भर करता है कि वह किस तरह के ऑडियंस तक पहुंचना चाहता है और वह उन ऑडियंस से क्या चाहता है। जैसे कि अगर आपको तुरंत अपने किसी प्रोडक्ट को बेचना है तो आपको गूगल एड्स, अमेज़न एड्स, फ्लिपकार्ट एड्स का इस्तेमाल करना चाहिए। 

वही अगर आपको अपना प्रोडक्ट भी बेचना है और अपनी ब्रांड वैल्यू भी बनानी है तो आप यूट्यूब ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा फेसबुक ऐड भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है तो आप अपने बिजनेस के हिसाब से किसी एक ऐड नेटवर्क को चुने। 

कंटेंट को तैयार करें

भले ही आपको ऑर्गेनिक मार्केटिंग की तरह ज्यादा कंटेंट को ना बनाना पड़े लेकिन inorganic marketing में भी आपको कुछ कंटेंट को बनाना होगा जैसे कि अगर आप वीडियो ऐड जाना चाहते हैं तो आपको वीडियो बनाना होगा। वही आपको सर्च ऐड/डिस्प्ले एड्स चलाना है तो आपको कुछ इमेजेस भी बनाने हो सकते हैं। उसके अलावा सोशल मीडिया पर अपने ऐड को चलाने के लिए भी कुछ तरह के इंफोग्राफिक्स भी बनाना होगा। तो आप बेतरीन कंटेंट को एड्स के लिए बनाए। 

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बजट को तय करके एड्स को Live करे  

अब वह समय आ चुका है जब आपको अपने ऐड नेटवर्क में सारे डिटेल्स को अपलोड कर देना है और उसके बाद अपने हिसाब से बजट को तय करना है। बजट को तय करने के बाद आप ऐड को लाइव कर दीजिए और इसके बाद आपको रिसीव करना है कि आपका एड्स कैसे चल रहा है और उसके बाद इसमें बदलाव करते रहना है। जिससे कि आपको ज्यादा से ज्यादा रिजल्ट मिल सके। 

inorganic marketing से ग्राहक मिलते है?

यदि आपका यह सवाल है कि इनऑर्गेनिक मार्केटिंग करके आपको कस्टमर मिल  सकते हैं या नहीं तो इसका जवाब हां भी हो सकता है और ना मिल सकता है।

इसके लिए आपको यह समझने की जरूरत है कि जब आप किसी प्लेटफार्म पर विज्ञापन को चलाते हैं तो वहां पर आपको कई सारे विकल्प मिलते हैं। जिसको अगर सही से इस्तेमाल किया जाए तो हमें ग्राहक मिल सकते हैं और सही से इस्तेमाल ना किया जाए तो हमें ग्राहक नहीं भी मिल सकते हैं। 

हम आपको बता दें कि अगर आप ₹500 का ऐड चलाते हैं तो ग्राहक के मिलने का चांसेस बहुत कम है। inorganic marketing करके ग्राहकों को हासिल करने के लिए आपके पास इनऑर्गेनिक मार्केटिंग करने का नॉलेज होना चाहिए। आसान शब्दों में कहा जाए तो ग्राहक मिलते हैं लेकिन इनऑर्गेनिक मार्केटिंग करना आना बहुत जरूरी है वरना बस पैसा ही बर्बाद होगा। 

Inorganic marketing और organic marketing में क्या अंतर है?

ऑर्गेनिक मार्केटिंग और Inorganic marketing में क्या अंतर है? तो हम आपको बता दें कि ऑर्गेनिक मार्केटिंग इस तरह की मार्केटिंग होती है जिसमें की बेहतरीन से बेहतरीन कॉन्टेंट लिखित रूप में, वीडियो के रूप में और फोटो के रूप में बनाया जाता है और यूजर के साथ अलग-अलग डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शेयर किया जाता है।

ऑर्गेनिक मार्केटिंग में कंटेंट को इस तरह से अप्टिमाइज किया जाता है जिससे कि वह ज्यादा ज्यादा लोगों तक फ्री में पहुंच सके और जब लोगों के पास वह कंटेंट पहुंचता है तो लोग कंटेंट को पसंद करते हैं और कंटेंट बनाने वाली संस्था के प्रति भी अच्छा विचार बनाने लगते हैं। इसी कारण वह आने वाले समय में उस संस्था या कंपनी के प्रोडक्ट को खरीदने में दिलचस्पी दिखाते हैं। 

वही Inorganic marketing एक तरह की मार्केटिंग होती है, जिसमें कि कई प्लेटफार्म में मौजूद एड्स विकल्प जैसे कि गूगल ऐड, फेसबुक ऐड का इस्तेमाल करके ज्यादा से ज्यादा यूज़र तक अपने कंटेंट को पैसा देकर के पहुंचाया जाता है। बेहतर कंटेंट नहीं होता है तो भी विज्ञापन की मदद से वह कई लोगों के पास पहुंच जाता है लेकिन इससे लोगों का विश्वास हासिल करने की संभावना ज्यादा नहीं होती है। 

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Google ads से SEO में फायदा होता है?

इनऑर्गेनिक मार्केटिंग में गूगल ऐड भी शामिल होता है तो बहुत से लोगों के मन में यह सवाल आता है कि अगर वह Google Ads को चलाते हैं तो क्या उनकी SEO में इससे अच्छा इफेक्ट पड़ेगा या नहीं। तो हम आपको बता दें कि गूगल एड्स या किसी अन्य तरह की inorganic marketing करने से SEO में बिल्कुल भी कोई फर्क नहीं पड़ता है। इस बात पर निर्भर करता है कि आप कितना अपने वेबसाइट में SEO करते हैं और कितना अपने कांटेक्ट में SEO करते हैं। 

inorganic marketing को करने में कितना पैसा लगता है?

inorganic marketing को करने में ज्यादा पैसा नहीं लगता है अगर आप कम ऑडियंस तक पहुंचना चाहते हैं तो। अगर आप ज्यादा है ऑडियंस तक पहुंचना चाहते हैं तो आपको ज्यादा पैसा भी लगाना हो सकता है। इनऑर्गेनिक मार्केटिंग को मात्र ₹500 से भी शुरू किया जा सकता है। 

अंत में कुछ शब्द 

तो दोस्तों हमने आज के इस पोस्ट में inorganic marketing के बारे में आप लोगों को विस्तार पूर्वक बताया। हमने कुछ दिन पहले ही एक पोस्ट पब्लिश किया था जिसमें कि हमने आप लोगों को inorganic marketing के बारे में बताया था।

इसके अलावा भी अगर आपको किसी और मार्केटिंग के बारे में जानना है तो आप हमारे वेबसाइट को चेक कर सकते है। यदि आपको inorganic marketing से जुड़ा कोई सवाल है तो फिर आप कमेंट करके पूछ सकते हैं तब तक के लिए धन्यवाद। 

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